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शिक्षा में स्थानिक बोध की उपेक्षा ठीक नहीं

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 आज हम ‘ग्लोबल विलेज’ के ताने-बाने में एक ‘बाना’ बनकर खुश हैं। हम यह मानकर चल रहे हैं कि पश्चिमोन्मुखी इस अवधारणा में अपनी पद्धतियों, अभ्यास और आकांक्षा का विलय ही हमारा भविष्य है। हमें ध्यान रखना चाहिए कि ‘विलेज’ मानव समूह की प्राथमिक इकाई नहीं है, पहली इकाई परिवार है। साथ ही, हमारी जरूरतें व आकांक्षाएं वैयक्तिक और पारिवारिक स्तर पर विकसित हुई हैं। हमारी संस्कृति के आधार ग्रंथों ने दुनिया के एक ‘नीड़’ हो जाने की कामना की थी, लेकिन तब भी वैविध्य और वैशिष्ट्य जिस तरह से भारत में पल्लवित-पुष्पित हुआ—ऐसा कहीं न हुआ। क्योंकि यहां नकार का भाव शून्य था। ‘ग्लोबल विलेज’ की अवधारणा में ऐसी उदारता नहीं है। इसमें लोकप्रियतावाद का आरोपण बहुत सी अच्छी पद्धतियों, अभ्यास और आकांक्षाओं का अहित कर रहा है। इसी का परिणाम है कि ‘पीपल और बरगद’ के लिए उपयुक्त भूमि व जलवायु में लोग ‘चिनार’ के पेड़ लगा रहे हैं। चिनार लगाने की कोशिश में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चिनार के मोह में पीपल-बरगद का नकार चिंताजनक है। यहां चिनार और पीपल को प्रतीक की तरह देखा जाना चाहिए। हम यह सब जानते समझते हुए भी स्वयं को असहाय पा र...

भाषाई एकात्मता की प्रतिनिधि बने हिंदी

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 भारत की भाषाई अवधारणा विश्वभर में अनूठी है। भाषा-विज्ञान की पाश्चात्य अवधारणा से अलग भारत की भाषा सम्बन्धी अवधारणा में एकात्म दृष्टि है और अंतर्भाषिक सम्बन्ध की स्वीकृति भी। भाषा की भारतीय अवधारणा ने भाषाओं के मध्य संगमन पर हमेशा जोर दिया है। विविध भाषाओं में एकत्व की धारणा के कारण ही निरुक्तकार यास्क ने वैदिक और लौकिक शब्दों की समानता के अंतर्गत अर्थ को स्थित माना है। शौनक ने भी अर्थ संधान की दृष्टि से वैदिक और लौकिक वचनों में सम्बन्ध मानते हुए कहा है कि जो वैदिक है उसे लौकिक बना लेना चाहिए। इस क्रम में संस्कृत ने न सिर्फ भारतीय भाषाओं की प्रतिनिधि भाषा के रूप में काम किया बल्कि भारतीय भाषाओं की व्याकरणिक व्यवस्था में सहयोग दिया। इस तरह से भारत की सभी भाषाओं में परस्पर आदान-प्रदान होता रहा है। साथ ही उनके परिष्करण में संस्कृत अपनी भूमिका निभाती रही है। अधिकांश भारतीय भाषायें संस्कृत व्याकरण दर्शन का ही अनुशरण करती हैं। जिन भाषाओं का उद्गम संस्कृत नहीं है, या जिनके साथ संस्कृत ने सहयात्रा की है उनके परिष्कार में भी संस्कृत का बड़ा योगदान रहा है। इसी के परिणामस्वरुप उत्तर और दक्षिण ...