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उतार की बारिश और जमुना किनारे हम

     बारिश से मोहक कोई आवृत्ति नहीं। उतार से अधिक पुलकित कोई अवस्था नहीं। उतार में उत्साह सघन होता है। जैसे भोर में नौटंकी के उतार का नगाड़ा, जैसे घर मुंहा होते ही मतवाले बैलों की सरपट चाल---उतार की अलग ही पुलक होती है। पड़ाव दिखने लगता है तो उसके आकर्षण का बल भी खींचता है, शायद इसीलिए गति बढ़ जाती है।  बादलों के अंतिम कार्य दिवस चल रहे हैं। कास तो कब की फूल चुकी है, धरती उन्हें लौट जाने को कह रही है। लेकिन, बादल शायद विजेता की तरह लौटना चाहते हैं। प्रत्यावर्तन नहीं करना चाहते। आज उन्होंने आसमान को चौगिर्द घेर रखा है। जैसे कह रहे हैं, माघ की ओरियां चूने में अभी देर है। सूखे सावन की शिकायतें भी हैं। आज मन भर बरसकर लौटते हैं।  हवाओं ने हमें छूकर कई बार मेघराज की मंशा बताई है। हम आसमान को निहारकर खुश हो रहे हैं। गौवों के नवजात पुलकित पायों से चौकड़ी भर रहे। जिस कार्यक्रम के लिए हम यहां थे उसका समापन हो चुका है। बच्चे जा चुके हैं, मोर निर्भय होकर झाड़ियों से फिर निकल आये हैं। जमुना का किनारा, मयूरों की बस्ती है। मोरों ने अपने बिरेंगे पंख पसार दिए हैं। तिलोरी की चहक संकेत...

महात्मा गांधी का भारत बोध

जब भारतबोध का विमर्श हो तो आधुनिक भारत के पहले और एकमात्र सर्वमान्य जननेता महात्मा गांधी जी की दृष्टि पर प्रमुखता से चर्चा की जानी चाहिए। चर्चा इसलिए भी होनी चाहिए क्योंकि उत्साही आयातित विचारधारायें तो अपनी आयु पूरी कर चुकीं लेकिन अपने भारतबोध के चलते गांधी आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं। महात्मा गांधी के आन्दोलनों, राजनीतिक दृष्टि व निर्णयों की चर्चा पहले खूब हो ही चुकी है। पत्रकार गांधी के रूप में उनकी समग्रता व पारदर्शिता अब दस्तावेज है। वहीं गांधी मूल्यों व गांधी व्रतों की भी कम ही सही स्वादानुसार व सुविधानुसार चर्चा होती रही है। लेकिन, उनके व्यक्तित्व के सबसे सुंदर पक्ष की चर्चा कम ही होती है और वह है उनका भारत-बोध। यही वह सूत्र है, जिसने समूचे भारत को उनके पीछे लाकर खड़ा कर दिया था। गांधी के प्रयासों की उर्जा इसी बोध में निहित थी, और सफलता का मूल मन्त्र भी यही बोध था। महात्मा गांधी अपने भारत बोध के चलते स्वामी विवेकानंद के सच्चे उत्तराधिकारी सिद्ध होते हैं, क्योंकि स्वामी विवेकानंद जी ने जो दृष्टि प्रकट की थी, उसे गांधी ने चरितार्थ कर दिखाया। सुंदर बात यह है कि गांधी के भारतबोध को स...