संदेश

मई, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जीने की राह: मनुष्य, इच्छा की सीमा से बहुत श्रेष्ठ है।

चित्र
मनुष्य में पूर्णता के दो पक्ष हैं, जिन्हें कुछ हद तक अलग करके देखा जा सकता है। ‘होने’ में पूर्णता और ‘करने’ में पूर्णता। यह कल्पना की जा सकती है कि प्रशिक्षण या प्रभाव से, ऐसे व्यक्ति से भी अच्छे काम कराये जा सकते हैं जो व्यक्तित्व के स्तर पर अच्छे नहीं है। यह भी देखा गया है कि घातक जोखिम वाली गतिविधियां अक्सर कायरों द्वारा की गई हैं, भले ही वे खतरे के प्रति सचेत रहे हों। ऐसे कार्य इसे करने वाले व्यक्ति के जीवनकाल के बाद भी मौजूद रह सकते हैं, और उपयोगी हो सकते हैं। बावजूद इसके इसे पूर्णता का पर्याय नहीं माना जा सकता।  जहां सवाल उपयोगिता का नहीं बल्कि नैतिक पूर्णता का है, हम यह महत्वपूर्ण मानते हैं कि व्यक्ति को अपनी अच्छाई को लेकर सच्चा होना चाहिए। उसका बाहरी अच्छा काम भले ही अच्छे परिणाम देता रहे, लेकिन उसके व्यक्तित्व की आंतरिक पूर्णता का अपना बहुत बड़ा मूल्य है, जो उसके लिए आध्यात्मिक स्वतंत्रता है और मानवता के लिए एक अनंत संपत्ति है, हालांकि हम इसे नहीं जानते होंगे। अच्छाई एक तरह से अहंकार से बचाव के भाव का ही व्यक्त रूप है यानी हमारे भीतर अहंकार को लेकर कितना दुराव है। अच्छाई ...